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SUCCESS का अचूक मंत्र : EXTRA EFFORTS 

दोस्तों नमस्कार ……

इस दुनिया में हर एक इंसान Success चाहता है । 
शायद आप और में भी ? 

👉 क्या इसे आसानी से पाया जा सकता है ? 


………लेकिन ये क्या हमने तो वचपन से लेकर आज तक यही सुना है कि जिंदगी में सफल होना बहुत मुश्किल काम है । और हम लोग भी यही मानते है ………..

लेकिन अगर हम सही हैं तो ऐंसा क्यों होता है ,कि कुछ लोग हमसे भी बुरी परिस्थितियों  में पैदा हुए, हमसे भी ज्यादा कठिनाइयों का सामना किया , उनके पास भी समय हमारे बराबर था और आज वो सफल हैं ।  तो Success सफलता का आसान तरीका कौंन सा हैं??? 

👉 मैंने जब इस पर बहुत सोचा तो कुछ समझ आया वही आपसे share कर रहा हूँ । 

दोस्तों हम सभी अपने अपने Interest के हिसाब से किसी न किसी को अपना Ideal मानते हैं…..
 …..मन ही मन उसके जैसा बनने के सपने देखते हैं ।। और इंतजार करते है किसी चमत्कार का…… जो हमें उसके जैसा बना दे, लेकिन दोस्तों ऐंसा चमत्कार कभी नहीं हुआ । 
तो हमें करना क्या पड़ेगा ? अब में सीधी बात करता हूँ, आज हम जो कुछ भी हैं अपनी आदतों (Habits) का नतीजा हैं ।

कहने का मतलव, हमारी आदतें या Habits इतनी Powerful होतीं हैं, कि ये हमारी Life बना भी सकती हैं…….. और Life को Destroy भी कर सकतीं हैं ।

  आप जिसके जैसे बनना चाहते हो, उसने भी कोई सफ़र तय किया है……. तब जाकर अपनी मंजिल पर पहुंचा हैं । मतलव हम उसके जैसा बनना तो चाहते हैं पर उसने क्या किया वह करना नहीं चाहते।  ……………अगर हम अपनें Ideal जैसा बनने के सपने के सांथ सांथ उसकी आदतें या Habits भी अपना ले, तो शायद हमें भी सफलता मिल सकती है । 

वस् एक ही बात समझने की कोशिश करें जितने भी सफल लोग हैं……… उन्होंने एक लक्ष्य बनाया और हर वह काम किया जो उन्हें अपने लक्ष्य Goal  के पास ले जाता है ।। उन्होंने जमकर Practice की , Extra Efforts लगाकर  अपने आप को बदला और बन गए  Ordinary से Extraordinary…….. कई बार वो भी हताश् हुए Reject हुए पर रुके नहीं।

दोस्तों , क्यों सफलता का दूसरा रास्ता ढूंढने में अपना समय बर्बाद करें । क्योंकि सफलता (Success) का तो एक ही आसान रास्ता है जो सफल लोगों ने तय किया है ….. उनकी habits अपनाओं और सफल हो जाओ ?

Also Read: एक दिन आप कभी हार नहीं मानने वाले सदाबहार व्यक्ति बन जाओगे

👉 Problem एक ही है -

Fitness या Rhitik Roshan की तरह Six Packs तो सभी चाहते हैं लेकिन Gym में पसीना कोई नहीं बहाना चाहता । 

   “मैं ट्रेनिंग के हर एक मिनट से नफ़रत करता था , लेकिन मैंने कहा , हार मत मानों ।

     अभी सह लो और बाक़ी की जिंदगी एक champion की तरह जियो  ।                                                                                                                                    

✔ Friends, हमारा Potential पहले से ही Comfort Zone नाम के कवर में क़ैद है । इस कवर को हटा दो क्योंकि Ordinary और Extra Ordinary में फ़र्क सिर्फ ज़रा से Extra का ही है।
मतलव साफ़ है, अपने आप को Comfort Zone से बाहर निकालने के लिए थोड़ा सा Extra Efforts करें और ऐँसी Habits को अपनाएं जो हमें अपने लक्ष्य के करीब ले जाएँ । शायद यही सफलता का अचूक मंत्र  है । 

✔ दोस्तों, आनें वाले blogs के माध्यम से हम सफल लोगों की एक एक आदत पर विस्तार से बात करेंगे और सांथ ही उन habits को कैसे अपनाया जा सकता है, तरीक़े जानने के प्रयास भी करेंगे । यदि आपको यह लेख अच्छा लगा , तो इसे share ज़रूर करें,और  subscribe करना न भूलें ।

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👉🏽 ख्वाईशों से नहीं खिलते हैं फूल झोली में,

कर्म की शाख को हिलाना होगा ।
कुछ नहीं होगा कोसने से अँधेरे को,

खुद दीपक बनकर जलना और फिर सबको जगाना होगा ।।

➡️ ज्यादा नहीं "बस एक नया कदम" अपने सपनों के लिए
 - Only one step daily for your dreams.

➡️ मित्रों अगर हम जिंदगी में सफलता पाना चाहते हैं तो,
 हर दिन सोने से पहले हम अपने आप से सिर्फ और सिर्फ यह प्रश्न पूछें कि :- 

▶️ "आज दिन भर में हमने ऐसा कौन-सा काम किया है", जो हमारे सपनों को पूरा करने में "मात्र एक, जी हाँ मात्र एक नया कदम" साबित हुआ ?

⏩ मित्रों हमें कहीं भी छलांग नहीं लगानी है, "बस एक नया कदम" अपने सपनों की ओर ।
पूछिये अपने आप से, सोचिये हर दिन और फिर करिये हर दिन, पर क्या - "बस एक नया कदम"। 
मित्रों किसी भी दिन हमने अपने सपनों की तरफ "बस एक नया कदम" उठाया की नहीं, यह याद रखने के लिए आप सभी से निवेदन है कि कुछ दिनों तक रोज़ सोने से पहले अपने घर में कैलेंडर में उस तारीख पर गोला मारना शुरू करें , एक साल के बाद कैलेन्डर में तारीखों पर गोले देखने के पर हमें खुद ही पता चल जायेगा कि हम अपने सपनों के प्रति कितने गंभीर (Serious) हैं ।

👉🏽 मित्रों उस वक़्त हमें अपने सपने पूरे न होने पर अपने अलावा कोई भी जिम्मेदार नज़र नहीं आना चाहिए और न ही आएगा ।
👉 (Don't blame anyone for our failures).

▶️ मित्रों हर दिन "बस एक नया कदम" मतलब एक साल के अंदर अंदर हम 365 नए कदम बढ़ चुकें होंगे अपने सपनों की तरफ और इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं, कि इन 365 दिनों में तो हमारे कई साथियों के तो सपने भी पूरे हो जाएँ ।

👉 मित्रों ध्यान रहे - हर दिन का काम चाहे कितना ही छोटा क्यों न हो - ‘‘हमें हमेशा उत्कृष्टता (BETTER) और उसी प्रकार परिपूर्णता (COMPLETENESS) के लिए प्रयास करना चाहिए, सर्वोत्कृष्टता (BEST) के अलावा और कोई भी विकल्प स्वीकार्य नहीं होना चाहिए’’ । यानि अपने लक्ष्यों, सपनों के लिए हर दिन चाहे हम "एक ही नया कदम" बढ़ाएं पर वह कदम सर्वोत्कृष्टता (BEST) होना चाहिए ।

👉 मित्रों, वही पुराना कदम नहीं, पहले ये बताइये कि आज कौन सा "एक नया कदम" उठाया हैं हमने, आज क्या "नया काम" किया है ।

तभी तो  ......
👉 किसी  ने क्या खूब लिखा है :-
ख्वाईशों से नहीं खिलते हैं फूल झोली में,

कर्म की शाख को हिलाना होगा। 

कुछ नहीं होगा कोसने से अँधेरे को,

खुद दीपक बनकर जलना और फिर सबको जगाना होगा ।।

जीवन में असली उड़ान अभी बाकी है,
हमारे इरादों का इम्तिहान अभी बाकि है,
अभी तो नापी है सिर्फ मुट्ठी भर जमीन,
अभी तो नापने के लिए सारा आसमान बाकी है.

दुनिया ने सिर्फ और सिर्फ उन्हें याद रखा जिन्होंने समाज के लिए कुछ अच्छा या शुभ काम किया वर्ना हमने तो अपनी पिछली पीढ़ियों (बुजुर्गों) को भी याद नहीं रखा ... 
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मित्रों जिंदगी में यदि कभी भी समाज के लिए अच्छा या शुभ काम करने का कोई भी विचार हमारे सामने आये तो उस क्षण को कभी भी हाथ से जाने मत देना, तुरंत उठो और कर दो क्योँकि हम लोगों के दिमाग में समाज के लिए करने के अच्छे विचार बहुत काम आते हैं. इसमें अगर हमने थोड़ी सी भी देर कर दी तो ये विचार अपने आप ही गुम हो जायेंगे और इसके बाद फिर हम भी अपनी जिंदगी की समस्याओं में कहीं खो जाते है और अच्छे काम करने का हमारा सपना, सपना बनकर ही हमारे साथ ऊपर चला जाता है. 

मित्रों दुनिया ने सिर्फ और सिर्फ उनको याद किया है जिन्होंने समाज के लिए कुछ किया है जैसे की गौतम बुद्ध, गांधीजी, सुभाष चंद्र बोस, भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, डॉ अब्दुल कलाम, डॉ भीमराव अंबेडकर, रानी लक्ष्मी बाई, स्वामी विवेकानंद, शिवाजी महाराज आदि और भी बहुत से नाम हैं आप याद करके देख सकते हैं. सोचिये क्या इन सभी ने अपने लिये काम किया था ? जी नहीं इन सभी ने एक पूरे समाज को नज़र में रख कर काम किया था. इन सभी लोगों ने समझ लिया था कि - "जिंदगी की सुंदरता इस बात में नहीं है की हम कितने ख़ुश रहते हैं, बल्कि इस बात में है कि कितने लोग हमसे खुश रहते हैं", ये बात गौर करने वाली है. पीढ़ियों तक नाम याद रखवाना है तो जिस समाज से सब कुछ लिया है उस समाज को निस्वार्थ रूप से सज्जनतापूर्वक लौटाना ही पड़ेगा, इसमें कोई दो राय नहीं है. 

इसलिए मित्रों, नाम उन्ही लोगों का लिया जाता है जो समाज के लिए कुछ करके गए हैं न की जिन्होंने सिर्फ अपने लिए कुछ किया है. हमारा यह सोचना की अगर हम अपनी सात पीढ़ियों के लिए कुछ करेंगे तो सातों पीढ़ियां हमारा गुणगान करेंगी, इस ग़लतफ़हमी को जितना जल्दी हो सके अपने दिमाग से निकाल दें. अपनी सात पीढ़ियों के लिए कुछ जोड़ने वाली हमारी सोच ने हमें इतना self centered बना दिया है कि हम न तो अपना ही भला कर पा रहे हैं और न ही उस समाज को कुछ वापस कर पा रहे हैं, जिस समाज से हमने सब कुछ लिया और सीखा है. 

मित्रों सच्चाई यह है कि "नाम सबको चाहिए पर काम सिर्फ अपने लिए होना चाहिए". कौन मना कर रहा है नाम के लिए पर "नाम सिर्फ और सिर्फ तब मिलेगा जब काम सबके लिए किया जायेगा न की सिर्फ अपने लिए, ये बात हमें ध्यान में रखनी ही होगी.
 
चीन की एक कहावत बड़ी मशहूर है :-
अगर हम 1 वर्ष के लिए सोचते है, तो वो फसल उगाते है.
अगर हम 10 वर्षों के लिए सोचते है, तो वो फल के वृक्ष उगाते है. 
और 
अगर हम हजारों वर्षों के लिए सोचते हैं, तो समाज के लिए काम करते है.

स्वामी विवेकानंद जी ने भी कहा है कि हम इंसानों को अपनी जिंदगी में "1000 साल" का काम पूरा करना है, मतलब "काम इतना अच्छा हो कि कम से कम वो काम 1000 साल आगे तक चलता रहे". 

"हम सभी ने अभी तक इस जिंदगी में कितने बरस का काम पूरा कर लिया है ये तो अपने अपने चिंतन का विषय है". 

मित्रों जब आज की पीढ़ी 1-1 हजार साल का काम पूरा करके जाएगी तभी हम अपने आगे आने वाली पीढ़ी के लिए कुछ छोड़ कर जायेंगे क्योँकि भारत सोने की चिड़िया थी, हमने तो सिर्फ सुना है पर कभी देखा नहीं. क्योँ न हम सभी अपनी जिंदगी में 1000 सालों का काम करके जाएँ जिससे की कम से कम हमारे आगे आने वाली पीढ़ी इस भारत को वैसे ही देख सके जैसा हमारे बुजुर्गों ने हमें बताया है. हम अपने समाज के लिए इतना कर जाएँ कि "हम लोगों के दिलों में बस जाएँ क्योँकि उसके बाद दिमाग में तो लोग खुद ही बसा लेते हैं".

मित्रों सोचिये सोचिये, ऐसे कामों के बारे में सोचिये जो कम से कम 1000 सालों तक चले.

मित्रों क्योँ न आज से ही इसके लिए तैयार हो जाएँ, ये कहते हुए कि :-

जीवन में असली उड़ान अभी बाकी है,
हमारे इरादों का इम्तिहान अभी बाकि है,
अभी तो नापी है सिर्फ मुट्ठी भर जमीन,
अभी तो नापने के लिए सारा आसमान बाकी है.

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